8 अप्रैल को हुए सीजफायर के ठीक दो महीने बाद, ईरान ने इजराइल पर अब तक का सबसे घातक मिसाइल हमला कर दिया है! लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि जब आसमान से मिसाइलें बरस रही थीं, तब ईरान के लोग सड़कों पर नाच रहे थे और जश्न मना रहे थे!”
मिडिल ईस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी और बेहद गंभीर खबर आ रही है। ईरान और इजराइल के बीच का सीजफायर पूरी तरह टूट चुका है और दोनों देश एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस बार के ऑपरेशन को नाम दिया गया है ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस नंबर 5‘। आज के इस लेख में हम समझेंगे कि आखिर यह युद्ध दोबारा क्यों भड़का, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्यों नाराज हैं, और कैसे अजरबैजान ने पीठ पीछे से इजराइल की बड़ी मदद की है।
दोस्तों, सोशल मीडिया पर इस हमले की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह हमला इजराइल के रमत डेविड एयरबेस को निशाना बनाकर किया गया था। इस दौरान ईरान और लेबनान की सड़कों पर लोग जश्न मनाते दिखे।
उनका तर्क है कि जब इजराइल पर हमला होता है तो वहां के लोग शेल्टर्स (बंकरों) में छिप जाते हैं, लेकिन ईरान के लोग खुले आसमान के नीचे इस कार्रवाई का जश्न मना रहे हैं। इस हमले के तुरंत बाद इजराइल ने भी पलटवार किया और ईरान के तेहरान, तबरीज और इसहान जैसे बड़े शहरों में भारी बमबारी की है।
सीजफायर के बाद हमला क्यों हुआ?
अब सवाल आता है कि जब 8 अप्रैल को दोनों देशों के बीच सीजफायर यानी युद्धविराम हो गया था, तो अचानक यह हमला क्यों हुआ? असल में, इस सीजफायर के दौरान ईरान की सबसे बड़ी शर्त यह थी कि इजराइल लेबनान पर हमला नहीं करेगा। ईरान वहां के हिजबुल्लाह समूह का समर्थन करता है। लेकिन इजराइल ने इस शर्त को डे-वन से ही मानने से इनकार कर दिया।
पिछले दो महीनों में इजराइल की बमबारी से लेबनान में करीब 3500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन में इजराइल और लेबनान के बीच दोबारा समझौता भी कराया, लेकिन इजराइल ने उसे अगले ही घंटे तोड़ दिया। इसी से नाराज होकर ईरान ने सीजफायर खत्म करने का एलान कर दिया।
हमले से डोनाल्ड ट्रंप नाराज
इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद नाराज हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने इजराइली पीएम नेतन्याहू को फोन करके साफ कहा कि वह इस हमले से खुश नहीं हैं, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच एक बहुत बड़ी न्यूक्लियर डील फाइनल होने वाली थी, जो इस युद्ध के कारण खटाई में पड़ सकती है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान को कड़ी धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान ने गल्फ देशों या समुद्री व्यापार को नुकसान पहुंचाया, तो दुनिया भर के बैंकों में फ्रीज पड़ी ईरान की करीब 100 बिलियन डॉलर की संपत्ति को जब्त करके पीड़ित देशों में बांट दिया जाएगा।
क्या अज़रबैजान ने की मदद
इस युद्ध का सबसे बड़ा ट्विस्ट है अजरबैजान! सीएनएन की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि अजरबैजान—जो कि तुर्की और पाकिस्तान का बेहद करीबी दोस्त माना जाता है—वो पर्दे के पीछे से इजराइल की मदद कर रहा था! इजराइल ने अजरबैजान, इराक और यूएई में अपने कमांडोज और इंटेलिजेंस नेटवर्क को एक्टिव कर रखा था। जब युद्ध चल रहा था, तब इजराइल को ईरान के भीतर की सटीक ग्राउंड रिपोर्ट्स और टारगेट्स की जानकारी इन्हीं जगहों से मिल रही थी।
दुनिया पर क्या होगा असर
अब आप सोच रहे होंगे कि क्या इस युद्ध से दुनिया ठप हो जाएगी? तो आपको बता दें कि पिछले दो महीनों से ‘स्टेट ऑफ हॉर्मोज‘ पहले से ही बंद चल रहा है, इसलिए दुनिया के बाजारों पर इसका कोई नया अप्रत्याशित असर नहीं दिख रहा है। दुनिया अब इसे रूस-यूक्रेन संकट की तरह एक लंबी चलने वाली जंग के रूप में देख रही है।
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