Modi Meloni Meeting: IMEC कॉरिडोर से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स हैरान

Modi Meloni Meeting: वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के मंच से इस वक्त एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खबर आ रही है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अपने पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में इटली की राजधानी रोम पहुंच चुके हैं। रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और इटली के संबंध अब एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गए हैं, जो आने वाले समय में पूरी दुनिया की Geopolitics को प्रभावित करेंगे।

Credit: Reuters

भारत और इटली अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए और सर्वोच्च स्तर पर ले जाते हुए इसे ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ (Special Strategic Partnership) का दर्जा दे रहे हैं। वैश्विक स्तर पर चल रही उथल-पुथल के बीच, इटली और संपूर्ण यूरोपीय संघ (EU) अब भारत को एक बेहद भरोसेमंद और मजबूत सहयोगी के रूप में देख रहे हैं। और यही कारण है कि यूरोपीय संघ ने अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए हाल ही में भारत के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता भी किया है।

2029 तक 20 अरब यूरो के व्यापार का लक्ष्य

इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान दोनों देशों के राष्ट्र प्रमुखों ने आपसी व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया है। वर्ष 2029 तक भारत और इटली के बीच आपसी व्यापार को 20 अरब यूरो (लगभग 23.2 अरब डॉलर) तक पहुंचाने का एक बड़ा लक्ष्य रखा गया है, जो वर्तमान में लगभग 14 अरब यूरो है।

इसके अलावा, इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • समुद्री परिवहन (Maritime Transport)
  • कृषि और खाद्य प्रसंस्करण (Agriculture)
  • उच्च शिक्षा (Higher Education)
  • महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)
  • आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence – AI)

साथ ही, दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन संकट, मध्य पूर्व के तनाव और हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) की सुरक्षा जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा होने जा रही है।

IMEC क्या है? (India-Middle East-Europe Economic Corridor)

इस ऐतिहासिक दौरे और वैश्विक व्यापार का सबसे बड़ा आकर्षण है ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ यानी IMEC। यह एक ऐतिहासिक और महत्वाकांक्षी वैश्विक व्यापार मार्ग (Trade Route) है, जिसकी घोषणा सितंबर 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी।

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यह केवल एक सड़क या समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि यह एशिया, अरब की खाड़ी और यूरोप को आपस में जोड़ने वाला एक विशाल आर्थिक नेटवर्क है।

IMEC कॉरिडोर को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है:

  • पूर्वी गलियारा (Eastern Corridor): यह समुद्री मार्ग के जरिए भारत (जैसे मुंबई और मुंद्रा पोर्ट) को अरब की खाड़ी (संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब) से जोड़ने का काम करेगा।
  • उत्तरी गलियारा (Northern Corridor): यह खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजराइल) से होते हुए रेलवे नेटवर्क और फिर समुद्री मार्ग के द्वारा सीधे यूरोप (यूनान/ग्रीस, इटली, फ्रांस, जर्मनी) तक पहुंचेगा।

आधुनिक तकनीकों से लैस होगा IMEC का गलियारा

IMEC परियोजना केवल माल ढुलाई (Cargo) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत कई आधुनिक तकनीकों और बुनियादी ढांचों को जोड़ा जाएगा:

  • रेलवे और पोत (Ship-to-Rail): जहाजों और ट्रेनों के बीच सामान की अदला-बदली (Transit) को बेहद सुगम और तेज बनाया जाएगा।
  • बिजली केबल (Electricity Cable): नवीकरणीय ऊर्जा (Clean Energy) को एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाने के लिए ग्रिड लाइन्स बिछाई जाएंगी।
  • हाइड्रोजन पाइपलाइन: भविष्य के ईंधन यानी क्लीन हाइड्रोजन के परिवहन के लिए विशेष पाइपलाइन का निर्माण किया जाएगा।
  • हाई-स्पीड डेटा केबल: डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए समुद्र के नीचे और जमीन पर फाइबर ऑप्टिक केबल नेटवर्क को विस्तार करने की योजना है।

IMEC की आवश्यकता क्यों पड़ी? (महत्व और लाभ)

मुख्य बिंदुविवरण
समय और लागत की बचतइस मार्ग के पूरी तरह शुरू होने से भारत और यूरोप के बीच व्यापार का समय लगभग 40% तक कम हो जाएगा और लागत (Transit Cost) में लगभग 30% तक की कमी आएगी।
स्वेज नहर पर निर्भरता कम होनावर्तमान में भारत से यूरोप जाने वाले जहाजों को स्वेज नहर (Suez Canal) से होकर गुजरना पड़ता है, जहाँ अक्सर जाम या सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ (जैसे लाल सागर संकट) बनी रहती हैं। IMEC इसका एक मजबूत विकल्प बनेगा।
चीन के BRI का जवाबइसे चीन की ‘वन बेल्ट, वन रोड’ (BRI) परियोजना के मुकाबले एक पारदर्शी, टिकाऊ और ऋण-मुक्त (Debt-free) विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

IMEC में शामिल देश और वैश्विक भागीदार

इस मेगा प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर करने वाले और इसका समर्थन करने वाले मुख्य देश हैं:

  • भारत
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
  • सऊदी अरब
  • यूरोपीय संघ (EU)
  • अमेरिका (जो इस परियोजना का मुख्य समर्थक और वित्तीय रणनीतिकार है)
  • इटली
  • फ्रांस
  • जर्मनी

भारत के लिए IMEC के क्या रणनीतिक मायने हैं?

भारत के लिए यह गलियारा और इटली के साथ यह साझेदारी रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।

  1. इससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और मेक इन इंडिया (Make in India) को भारी बढ़ावा मिलेगा।
  2. खाड़ी देशों और यूरोपीय देशों के साथ भारत के संबंध और अधिक मजबूत होंगे।
  3. भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का एक प्रमुख और विश्वसनीय केंद्र बनकर उभरेगा।

चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के लिए बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि IMEC चीन (China) के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और पाकिस्तान के चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। चीन (China) पिछले कई वर्षों से अलग-अलग कई देशों (जैसे: पाकिस्तान, श्रीलंका आदि ) में सड़क, बंदरगाह और रेल परियोजनाओं पर काम कर रहा है। हालांकि कई देशों ने चीन की परियोजनाओं में बढ़ते कर्ज और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को लेकर सवाल भी उठाए हैं। ऐसे में IMEC को एक पारदर्शी और भरोसेमंद व्यापारिक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

निष्कर्ष: ‘इंडो-मेडिटेरेनीयन’ युग की शुरुआत

रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और इटली की यह नई ‘इंडो-मेडिटेरेनीयन’ (भारत-भूमध्यसागरीय) साझेदारी आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और सुरक्षा की दिशा तय करेगी। यह भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और कूटनीतिक जीत का एक बड़ा उदाहरण है।

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