Russia Ukraine War Update: यूक्रेन ने 500KM अंदर घुसकर मॉस्को में किया बड़ा हमला, S-400 तबाह

Russia Ukraine War Update: पिछले चार सालों से चल रहे रूस और यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) को लेकर दुनिया भर में यह बात लोग मानने लगे, कि यह अब केवल एक ‘डिफेंसिव’ (रक्षात्मक) लड़ाई रह गई है।

लेकिन, यूक्रेन ने अचानक एक ऐसा भयंकर हमला किया है, जिसने पूरी दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों (Defence Expert) को चौंका दिया है। यूक्रेन ने अपनी सीमा से 500 किलोमीटर अंदर रूस की राजधानी मॉस्को (Moscow) के आस-पास सैन्य ठिकानों पर सबसे बड़ा ड्रोन और मिसाइल हमला किया है।

यूक्रेन के इस हमले ने न केवल रूस के सबसे ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम S-400 को नाकाम कर दिया, बल्कि भू-राजनीति (Geopolitics) में भी एक एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। रूस पर हुए इस हमले में एक भारतीय नागरिक के भी मारे जाने की दुखद खबर सामने आई है। आइए इस हमले की इनसाइड स्टोरी और इसके ग्लोबल इम्पैक्ट को विस्तार से समझते हैं।

पुतिन का सबसे दमदार डिफेंस सिस्टम S-400 कैसे फेल हुआ?

पहले तो पश्चिमी देशों और अमेरिका ने यूक्रेन को लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार देने से मना कर दिया था। क्योंकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सभी देशों को चेतावनी दी थी कि, हथियार देने वाले देश को वह युद्ध का सीधा भागीदार मानेंगे। लेकिन, यूक्रेन ने बीते इन चार सालों में खुद अपनी एडवांस मिसाइल और ड्रोन तकनीक विकसित कर ली।

सबसे दमदार डिफेंस सिस्टम S-400
सबसे दमदार डिफेंस सिस्टम S-400

हाल ही मे हुए इस हमले में यूक्रेन ने मुख्य रूप से दो घातक स्वदेशी मिसाइलों का इस्तेमाल किया:

फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल (Flamingo Cruise Missile): यह एक क्रूज मिसाइल है जो 3000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। यह मिसाइल ज़मीन की सतह के बिल्कुल समानांतर (parallel) उड़ती है, जिसके कारण डिफेंस रडार इसे ट्रैक नहीं कर पाते। जानकारों का मानना है की यही सबसे बड़ा कारण है S – 400 सिस्टम के नाकाम होने का। 

नेप्च्यून एमडी मिसाइल (Neptune MD Missile): भारी मात्रा मे विस्फोटक ले जाने में सक्षम यह मिसाइल 1000 किलोमीटर की रेंज तक तबाही मचा सकती है।

इस हमले में यूक्रेन ने एक साथ हज़ारों ड्रोन्स और इन नई क्रूज मिसाइलों का झुंड (Swarm attack) रूस की तरफ छोड़ा। रूस का S-400 रडार सिस्टम, जिसे दुनिया के सबसे बेहतरीन डिफेंस सिस्टम्स में गिना जाता है, इस ‘लो-फ्लाइंग’ (low-flying) हमले को डिटेक्ट करने में नाकाम रहा और खुद तबाह हो गया। इसी डिफेंस सिस्टम के वजह से रूस का दबदबा माना जाता है। 

हमले की इनसाइड स्टोरी: ‘विक्ट्री डे’ बनाम ‘यूरोप डे’

रूस का विक्ट्री डे
रूस का विक्ट्री डे

यूक्रेन के द्वारा अचानक हुए इस पलटवार के पीछे 9 मई की एक कूटनीतिक घटना भी जिम्मेदार है।

रूस का विक्ट्री डे: 9 मई को रूस 1945 में जर्मनी पर मिली जीत के उपलक्ष्य में ‘विक्ट्री डे’ मनाता है। इस खास मौके पर पुतिन ने 9 से 11 मई तक तीन दिन के सीजफायर का ऐलान किया था।

यूक्रेन का दांव: राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने ‘विक्ट्री डे’ मनाने से इनकार कर दिया और पश्चिमी देशों के साथ एकजुटता दिखाते हुए ‘यूरोप डे’ (Europe Day) मनाया।

रूस का हमला और पलटवार: यूक्रेन के इस कूटनीतिक झटके से बौखलाए रूस ने 11 मई की रात सीजफायर खत्म होते ही यूक्रेन पर 200 ड्रोन्स से एक साथ हमला कर दिया। और इसी का बदला लेने के लिए यूक्रेन ने 13 मई को मॉस्को और उसके एनर्जी साइट्स (Oil Refineries) को निशाना बनाते हुए यह ऐतिहासिक पलटवार किया।

रूस में सैनिकों की कमी और मोल्दोवा एंगल

काफी समय से चल रहे इस युद्ध के कारण रूस को अब सैनिकों की भारी कमी (Manpower shortage) का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 5 लाख से अधिक रूसी सैनिक इस युद्ध में मारे जा चुके हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए रूस अब नए मोर्चे खोल रहा है।

पुतिन ने यूक्रेन के एक पड़ोसी देश मोल्दोवा (Moldova) के एक विवादित हिस्से ‘ट्रांसनिस्ट्रिया’ (Transnistria) के नागरिकों को रूसी नागरिकता देनी शुरू कर दी है। यह इलाका रूसी समर्थकों का माना जाता है। पुतिन की रणनीति अब यूक्रेन को पश्चिमी सीमा से भी घेरने की है, ताकि युद्ध में एक नया फ्रंट खोला जा सके।

भारत के लिए चिंता: एक भारतीय की मौत

इस भीषण युद्ध का असर भारत पर भी पड़ रहा है। मॉस्को के पास रिहायशी और औद्योगिक इलाकों में हुए इस यूक्रेन के ड्रोन हमले में कुल 4 लोगों की मौत हो गई है, मरने वालों मे एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। अब तक लगभग 32 से अधिक भारतीय (जो रोज़गार के नाम पर या धोखे से रशियन आर्मी में भर्ती कर लिए गए थे) इस युद्ध में अपनी जान गंवा चुके हैं। 

भारत सरकार लगातार रूस के संपर्क में है और प्रधानमंत्री स्तर पर भी भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी के लिए बातचीत हो चुकी है, लेकिन यह ताज़ा हमला भारत की चिंताओं को और भी बढ़ा देता है।

ग्लोबल इम्पैक्ट: अमेरिका और चीन की भूमिका

लंबे समय से चल रहा यह युद्ध अब केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं है। अमेरिका और पश्चिमी देशों (NATO) का मानना है कि, रूस और ईरान की युद्ध मशीनरी को पर्दे के पीछे से चीन (China) चला रहा है। क्योंकि चीन रूस से तेल खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत कर रहा है। आज का यह ‘शीत युद्ध’ (Cold War) असल में अमेरिका बनाम चीन का रूप ले चुका है, जहाँ यूक्रेन और रूस इसमें मोहरे की तरह इस्तेमाल हो रहे हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

यूक्रेन ने रूस के 500KM अंदर हमला करके यह साबित कर दिया है कि, वह अब झुकने वाला बिल्कुल नहीं है। S-400 जैसे डिफेंस सिस्टम का फेल होना रूस के लिए एक बड़ी रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक हार है। तो वहीं दूसरी तरफ जेलेंस्की के लिए यह युद्ध पश्चिमी देशों से फण्ड (Fund) हासिल करने का एक ज़रिया भी बन चुका है।

आने वाले दिनों में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि पुतिन इस महा-हमले का क्या और कैसे जवाब देते हैं। और क्या यह आक्रामकता दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) के और करीब ले जाएगी।

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